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590 करोड़ का बड़ा घोटाला
खाता बंद कराने पर सामने आया 590 करोड़ का बैंक घोटाला
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में 590 करोड़ की हेराफेरी, मास्टरमाइंड सहित चार आरोपी गिरफ्तार
25 Feb 2026, 11:54 AM Haryana - Ambala
Reporter : Mahesh Sharma
Ambala हरियाणा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ा लगभग 590 करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने से प्रशासन और जांच एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। यह मामला चंडीगढ़ स्थित बैंक शाखा से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां सरकारी विभागों के खातों में भारी वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ। विजिलेंस विभाग ने कार्रवाई करते हुए इस घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक शाखा में मौजूद अपने खाते को बंद कराने और जमा राशि को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान खातों में दर्ज राशि और वास्तविक उपलब्ध धनराशि के बीच बड़ा अंतर सामने आया, जिससे घोटाले की आशंका पैदा हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने तुरंत सभी विभागों को संबंधित बैंक से अपने खाते बंद करने और धनराशि निकालने के निर्देश जारी कर दिए। इसके साथ ही विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो को विस्तृत जांच सौंपी गई। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की पुष्टि होने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई तेज कर दी।

विजिलेंस टीम ने 24 फरवरी की शाम को छापेमारी करते हुए कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया। अन्य आरोपियों में अभय कुमार, स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घोटाले में और कितने लोग शामिल हैं और यह हेराफेरी कितने समय से चल रही थी।

अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से बैंक खातों में गड़बड़ी कर बड़ी रकम का दुरुपयोग किया। फिलहाल बैंक के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और लेनदेन की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

इस घोटाले का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। खबर सामने आने के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है।

सरकार ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस घोटाले में किसी बैंक अधिकारी या अन्य संस्थागत व्यक्ति की भी भूमिका रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
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