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जांच समिति में बदलाव
महाभियोग जांच समिति में बदलाव, बॉम्बे हाईकोर्ट चीफ जस्टिस जोड़े गए
जस्टिस यशवंत वर्मा जांच समिति में बदलाव, मद्रास हाईकोर्ट की जगह बॉम्बे हाईकोर्ट शामिल किया गया
26 Feb 2026, 09:23 AM
Uttar Pradesh
-
Prayagraj (Allahabad)
Reporter :
Mahesh Sharma
Prayagraj (Allahabad)
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश Yashwant Verma के खिलाफ चल रही महाभियोग प्रक्रिया के बीच जांच समिति की संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने समिति में संशोधन करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की जगह अब बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने का निर्णय लिया है।
यह समिति जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए लाए गए महाभियोग प्रस्ताव की जांच कर रही है। पहले समिति में मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस Manindra Mohan Shrivastava को शामिल किया गया था, लेकिन अब उनकी जगह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Chandrashekhar Dharmadhikari को समिति का सदस्य बनाया गया है। इस बदलाव को जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि उनके सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के दौरान दमकल और पुलिसकर्मियों को मौके से बड़ी मात्रा में जले हुए नोट बरामद हुए थे। इस घटना ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले की जांच पहले उच्चतम स्तर पर की गई थी और इसके बाद संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। अब गठित जांच समिति सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
महाभियोग की प्रक्रिया भारतीय न्यायिक प्रणाली में अत्यंत गंभीर मानी जाती है और यह केवल विशेष परिस्थितियों में ही अपनाई जाती है। किसी भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना दुर्लभ घटनाओं में गिना जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि समिति में बदलाव से जांच प्रक्रिया को नई दिशा मिल सकती है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संसद द्वारा गठित समिति मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
यह समिति जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए लाए गए महाभियोग प्रस्ताव की जांच कर रही है। पहले समिति में मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस Manindra Mohan Shrivastava को शामिल किया गया था, लेकिन अब उनकी जगह बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Chandrashekhar Dharmadhikari को समिति का सदस्य बनाया गया है। इस बदलाव को जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत किया गया था। आरोप है कि उनके सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के दौरान दमकल और पुलिसकर्मियों को मौके से बड़ी मात्रा में जले हुए नोट बरामद हुए थे। इस घटना ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
मामले की जांच पहले उच्चतम स्तर पर की गई थी और इसके बाद संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। अब गठित जांच समिति सभी तथ्यों और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
महाभियोग की प्रक्रिया भारतीय न्यायिक प्रणाली में अत्यंत गंभीर मानी जाती है और यह केवल विशेष परिस्थितियों में ही अपनाई जाती है। किसी भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना दुर्लभ घटनाओं में गिना जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि समिति में बदलाव से जांच प्रक्रिया को नई दिशा मिल सकती है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर भी पड़ सकता है।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल संसद द्वारा गठित समिति मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है।
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