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चीतों पर भारी खर्च
चीतों को प्रतिदिन बकरी का मांस खिलाया जा रहा
कूनो में चीतों के भोजन पर भारी खर्च, रोजाना बकरी मांस पर हजारों रुपये खर्च
26 Feb 2026, 10:32 AM
Madhya Pradesh
-
Shujalpur
Reporter :
Mahesh Sharma
Shujalpur
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में रह रहे चीतों के भोजन पर होने वाले खर्च को लेकर विधानसभा में अहम जानकारी सामने आई है। सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार चीतों के भोजन के लिए प्रतिदिन औसतन लगभग 35 हजार रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस राशि से मुख्य रूप से बकरी का मांस उपलब्ध कराया जाता है, जिससे चीतों की पोषण जरूरतों को पूरा किया जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में चीतों के भोजन पर करीब 1.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह राशि वन्यजीव प्रबंधन के बजट से जारी की जाती है और इसके लिए अलग से कोई विशेष मद निर्धारित नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि चीतों के संरक्षण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष के विधायकों ने चीतों के पार्क से बाहर निकलने के मामलों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पार्क के अंदर पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध नहीं होने के कारण चीते बाहर की ओर जा रहे हैं। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भोजन की कमी के कारण चीतों को बाहर निकलना पड़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों में चिंता का माहौल बन रहा है।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चीतों की निगरानी के लिए विशेष टीम लगातार काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक और ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
वन विभाग के अनुसार चीतों को नियंत्रित वातावरण में भोजन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे स्वस्थ रहें और नए वातावरण में आसानी से अनुकूल हो सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों को नए क्षेत्र में बसाने की प्रक्रिया लंबी होती है और शुरुआती वर्षों में अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को बसाने की परियोजना देश की महत्वपूर्ण वन्यजीव योजनाओं में से एक मानी जाती है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य देश में चीतों की संख्या बढ़ाना और जैव विविधता को मजबूत करना है।
हालांकि चीतों के भोजन पर हो रहे खर्च को लेकर बहस जारी है, लेकिन सरकार का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के लिए यह खर्च आवश्यक है और इससे परियोजना को सफल बनाने में मदद मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में चीतों के भोजन पर करीब 1.27 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह राशि वन्यजीव प्रबंधन के बजट से जारी की जाती है और इसके लिए अलग से कोई विशेष मद निर्धारित नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि चीतों के संरक्षण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें नियमित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान विपक्ष के विधायकों ने चीतों के पार्क से बाहर निकलने के मामलों को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पार्क के अंदर पर्याप्त प्राकृतिक शिकार उपलब्ध नहीं होने के कारण चीते बाहर की ओर जा रहे हैं। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भोजन की कमी के कारण चीतों को बाहर निकलना पड़ रहा है, जिससे आसपास के गांवों में चिंता का माहौल बन रहा है।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चीतों की निगरानी के लिए विशेष टीम लगातार काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक और ट्रैकिंग सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से उन्हें सुरक्षित रखा जा सके।
वन विभाग के अनुसार चीतों को नियंत्रित वातावरण में भोजन उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे स्वस्थ रहें और नए वातावरण में आसानी से अनुकूल हो सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि चीतों को नए क्षेत्र में बसाने की प्रक्रिया लंबी होती है और शुरुआती वर्षों में अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को बसाने की परियोजना देश की महत्वपूर्ण वन्यजीव योजनाओं में से एक मानी जाती है। सरकार का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य देश में चीतों की संख्या बढ़ाना और जैव विविधता को मजबूत करना है।
हालांकि चीतों के भोजन पर हो रहे खर्च को लेकर बहस जारी है, लेकिन सरकार का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण के लिए यह खर्च आवश्यक है और इससे परियोजना को सफल बनाने में मदद मिलेगी।
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