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PM मोदी दौरे पर
लेफ्ट पार्टी आज भी इजरायल के खिलाफ विरोध करती है
ज्योति बसु ने इजरायल दौरा किया, PM मोदी के दौरे पर लेफ्ट पार्टी शर्मिंदा
25 Feb 2026, 03:29 PM
West Bengal
-
Kolkata
Reporter :
Mahesh Sharma
Kolkata
भारत की राजनीति में इजरायल को लेकर लंबे समय से विभिन्न दलों की अलग-अलग नीतियां रही हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और कम्युनिस्ट नेता ज्योति बसु ने इस दिशा में एक साहसिक कदम उठाया। जून 2000 में, तब वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने इजरायल का दौरा किया। यह उस समय के राजनीतिक टैबू को तोड़ने वाला कदम था, जिसकी हिम्मत बहुत कम नेताओं ने ही दिखाई थी।
ज्योति बसु ने इजरायल दौरे का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, और उच्च तकनीक क्षेत्रों के साथ-साथ कृषि और औद्योगिक विकास के लिए सहयोग स्थापित करना बताया। उनकी समझ यह थी कि इजरायल की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति भारत और विशेषकर पश्चिम बंगाल के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके दौर में कई कंपनियों ने IT, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि क्षेत्रों में इजरायल के साथ सहयोग स्थापित किया।
हालांकि, लेफ्ट पार्टी के कुछ नेताओं ने आज भी इजरायल के दौरे का विरोध किया है। एम ए बेबी जैसे नेता इजरायल के प्रधानमंत्री को युद्ध अपराधी तक कह चुके हैं। उनका मानना है कि इजरायल और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग असंवैधानिक है और यह फिलिस्तीन की स्थिति को और जटिल बना सकता है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी से इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनके दौरे का एजेंडा रक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। मोदी के दौरे को लेफ्ट पार्टी आलोचना का विषय बना रही है और इसे शर्म की बात बता रही है। यह विरोध ज्योति बसु के दौर में उठाए गए कदम की तुलना में बहुत अलग है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्योति बसु का दौरा और मोदी का दौरा दोनों ही भारत की अंतरराष्ट्रीय दृष्टि और कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में हैं। जहां ज्योति बसु ने विज्ञान और उच्च तकनीक को केंद्रित किया, वहीं मोदी का दौरा रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है। दोनों ही नेताओं के कदम यह दिखाते हैं कि इजरायल के साथ सहयोग में भारत को व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
ज्योति बसु इजरायल दौरे से जुड़ी राजनीतिक और सांस्कृतिक चुनौतियों को समझते थे। उनकी फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात के साथ भी गहरी दोस्ती थी। उन्होंने किबुत्ज़ जैसे सोशलिस्ट विचारों और कम्युनिटेरियनिज़्म आधारित समुदायों से प्रभावित होकर पश्चिम बंगाल में नई दिशा देने की कोशिश की।
आज, पीएम मोदी के दौरे के दौरान इन पहलुओं का महत्व दोहरी तरह से सामने आता है। यह न केवल भारत और इजरायल के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल के पूर्व अनुभव और राजनीतिक दृष्टिकोण को भी याद दिलाता है।
इस प्रकार, ज्योति बसु और पीएम मोदी के इजरायल दौरे अलग-अलग समय और दृष्टिकोण से भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आर्थिक रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
ज्योति बसु ने इजरायल दौरे का उद्देश्य विज्ञान, तकनीक, और उच्च तकनीक क्षेत्रों के साथ-साथ कृषि और औद्योगिक विकास के लिए सहयोग स्थापित करना बताया। उनकी समझ यह थी कि इजरायल की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति भारत और विशेषकर पश्चिम बंगाल के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके दौर में कई कंपनियों ने IT, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि क्षेत्रों में इजरायल के साथ सहयोग स्थापित किया।
हालांकि, लेफ्ट पार्टी के कुछ नेताओं ने आज भी इजरायल के दौरे का विरोध किया है। एम ए बेबी जैसे नेता इजरायल के प्रधानमंत्री को युद्ध अपराधी तक कह चुके हैं। उनका मानना है कि इजरायल और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग असंवैधानिक है और यह फिलिस्तीन की स्थिति को और जटिल बना सकता है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी से इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनके दौरे का एजेंडा रक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। मोदी के दौरे को लेफ्ट पार्टी आलोचना का विषय बना रही है और इसे शर्म की बात बता रही है। यह विरोध ज्योति बसु के दौर में उठाए गए कदम की तुलना में बहुत अलग है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्योति बसु का दौरा और मोदी का दौरा दोनों ही भारत की अंतरराष्ट्रीय दृष्टि और कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में हैं। जहां ज्योति बसु ने विज्ञान और उच्च तकनीक को केंद्रित किया, वहीं मोदी का दौरा रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है। दोनों ही नेताओं के कदम यह दिखाते हैं कि इजरायल के साथ सहयोग में भारत को व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
ज्योति बसु इजरायल दौरे से जुड़ी राजनीतिक और सांस्कृतिक चुनौतियों को समझते थे। उनकी फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात के साथ भी गहरी दोस्ती थी। उन्होंने किबुत्ज़ जैसे सोशलिस्ट विचारों और कम्युनिटेरियनिज़्म आधारित समुदायों से प्रभावित होकर पश्चिम बंगाल में नई दिशा देने की कोशिश की।
आज, पीएम मोदी के दौरे के दौरान इन पहलुओं का महत्व दोहरी तरह से सामने आता है। यह न केवल भारत और इजरायल के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल के पूर्व अनुभव और राजनीतिक दृष्टिकोण को भी याद दिलाता है।
इस प्रकार, ज्योति बसु और पीएम मोदी के इजरायल दौरे अलग-अलग समय और दृष्टिकोण से भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आर्थिक रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं।
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