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कश्मीरी छात्रों की शिकायत
कश्मीरी छात्रों ने कैंपस में भोजन व्यवस्था पर सवाल उठाए
कश्मीरी छात्रों के भोजन विवाद पर कार्रवाई, यूनिवर्सिटी प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल, वाइस चांसलर हटे
26 Feb 2026, 11:58 AM
Punjab
-
Ludhiana
Reporter :
Mahesh Sharma
Ludhiana
पंजाब के लुधियाना स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों द्वारा भोजन व्यवस्था को लेकर उठाए गए विवाद ने बड़ा रूप ले लिया, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए कुलपति को पद से हटा दिया गया। यह मामला रमजान के दौरान रोज़ा रखने वाले छात्रों के लिए भोजन व्यवस्था से जुड़ा बताया जा रहा है।
कश्मीरी छात्रों का आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से रमजान के महीने में रोज़ा खोलने और सहरी के समय के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। छात्रों का कहना है कि उन्हें कैंपस की कैंटीन में समयानुसार भोजन नहीं दिया गया, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब छात्रों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और उनकी धार्मिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज किया गया। छात्रों ने यह भी कहा कि वे विश्वविद्यालय परिसर में असहज महसूस कर रहे हैं और प्रशासन से उचित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुलपति का एक कथित वीडियो सामने आया, जिसमें वे छात्रों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए दिखाई दिए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विभिन्न संगठनों तथा नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। स्थिति को नियंत्रित करने और कैंपस में शांति बनाए रखने के प्रयास किए गए। बाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए कुलपति को पद से हटाने का निर्णय लिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में सभी छात्रों के लिए सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना प्राथमिकता है। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न राज्यों और समुदायों से आने वाले छात्रों की जरूरतों को समझने और संवेदनशीलता बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद और समन्वय से विवाद को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन यह मामला शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक जिम्मेदारी और छात्रों के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।
कश्मीरी छात्रों का आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से रमजान के महीने में रोज़ा खोलने और सहरी के समय के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। छात्रों का कहना है कि उन्हें कैंपस की कैंटीन में समयानुसार भोजन नहीं दिया गया, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस विवाद ने तब तूल पकड़ा जब छात्रों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में छात्रों ने आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है और उनकी धार्मिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज किया गया। छात्रों ने यह भी कहा कि वे विश्वविद्यालय परिसर में असहज महसूस कर रहे हैं और प्रशासन से उचित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुलपति का एक कथित वीडियो सामने आया, जिसमें वे छात्रों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए दिखाई दिए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विभिन्न संगठनों तथा नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। स्थिति को नियंत्रित करने और कैंपस में शांति बनाए रखने के प्रयास किए गए। बाद में प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए कुलपति को पद से हटाने का निर्णय लिया गया।
अधिकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में सभी छात्रों के लिए सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना प्राथमिकता है। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया कि छात्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भोजन व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।
इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न राज्यों और समुदायों से आने वाले छात्रों की जरूरतों को समझने और संवेदनशीलता बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद और समन्वय से विवाद को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन यह मामला शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक जिम्मेदारी और छात्रों के अधिकारों को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।
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