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कनाडा पीएम का भारत दौरा
कनाडा भारत से व्यापार सहयोग बढ़ाने की उम्मीद लेकर आया
अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच कनाडा भारत से व्यापार बढ़ाने और नए समझौतों की उम्मीद लगाए बैठा
26 Feb 2026, 01:31 PM Delhi - New Delhi
Reporter : Mahesh Sharma
New Delhi अमेरिका की नई टैरिफ नीतियों के कारण बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच कनाडा भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी सिलसिले में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney भारत दौरे पर आ रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की व्यापारिक नीतियों और टैरिफ बढ़ोतरी के कारण कनाडा को निर्यात के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कनाडा एशियाई बाजारों की ओर ध्यान दे रहा है और भारत को एक बड़े और स्थिर व्यापारिक साझेदार के रूप में देख रहा है।

भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच कृषि उत्पाद, ऊर्जा संसाधन, मशीनरी और औद्योगिक वस्तुओं का बड़ा कारोबार होता है। कनाडा से भारत को दालें, उर्वरक, लकड़ी और खनिज उत्पादों का निर्यात किया जाता है, जबकि भारत से कनाडा को दवाइयां, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और आईटी सेवाएं भेजी जाती हैं।

प्रधानमंत्री कार्नी के इस दौरे के दौरान कई व्यापारिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें निवेश और औद्योगिक सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश आपसी व्यापार को और अधिक बढ़ाने के लिए नए समझौते कर सकते हैं। विशेष रूप से कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के कारण कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन चुका है। वहीं भारत के लिए कनाडा प्राकृतिक संसाधनों और ऊर्जा आपूर्ति का एक भरोसेमंद स्रोत है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों पर विचार किया जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव ने कनाडा को नए साझेदार तलाशने के लिए प्रेरित किया है और भारत इस दिशा में सबसे प्रमुख विकल्पों में शामिल है।

इस दौरे को आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
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