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भारत की पहली म्यूजिकल रोड
70-80 किमी रफ्तार पर टायर बजाएंगे ‘जय हो’
मुंबई में देश की पहली मेलोडी रोड, तय रफ्तार पर बजेगी ‘जय हो’ की धुन
12 Feb 2026, 11:31 AM
Maharashtra
-
Mumbai
Reporter :
Mahesh Sharma
Mumbai
मुंबई के कोस्टल रोड पर अब सफर केवल तेज और सुगम ही नहीं, बल्कि संगीतमय भी होगा। देश की पहली ‘म्यूजिकल रोड’ या ‘मेलोडी रोड’ का निर्माण यहां किया गया है, जहां वाहन के टायरों की रगड़ से मशहूर गीत ‘जय हो’ की धुन सुनाई देगी। यह अनोखा प्रयोग मुंबई कोस्टल रोड के नरीमन प्वाइंट से वर्ली की ओर जाने वाले हिस्से में किया गया है।
इस विशेष सड़क पर इंजीनियरों ने खास डिजाइन की गई ग्रूव्स (खांचे) तैयार किए हैं। जब कोई वाहन लगभग 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तय रफ्तार से इस हिस्से से गुजरता है, तो टायरों और सड़क के बीच उत्पन्न कंपन एक निश्चित धुन में बदल जाता है। यही कंपन ‘जय हो’ गीत की धुन का अहसास कराता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देना भी है। चूंकि धुन तभी स्पष्ट सुनाई देती है जब वाहन निर्धारित गति सीमा में चलता है, इसलिए यह ड्राइवरों को सही स्पीड बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
दुनिया में मेलोडी रोड की अवधारणा सबसे पहले जापान में विकसित की गई थी। इसके बाद दक्षिण कोरिया, हंगरी और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी इस तकनीक का उपयोग हुआ। अब भारत ने भी इस नवाचार को अपनाते हुए मुंबई में इसकी शुरुआत की है।
करीब 10.5 किलोमीटर लंबी मुंबई कोस्टल रोड पहले ही शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने और यात्रा समय घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में यह संगीतमय पहल यात्रियों के अनुभव को और खास बनाएगी।
नगर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में अन्य शहरों या राजमार्गों पर भी इस तरह की मेलोडी रोड विकसित की जा सकती है। हालांकि इसके रखरखाव और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मुंबई, जो पहले से ही फिल्म, संगीत और रचनात्मकता का केंद्र माना जाता है, अब सड़क परिवहन में भी एक नया सुर जोड़ चुका है। ‘जय हो’ की धुन के साथ यह सड़क न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण बनेगी, बल्कि यात्रियों के लिए एक यादगार अनुभव भी साबित होगी।
इस विशेष सड़क पर इंजीनियरों ने खास डिजाइन की गई ग्रूव्स (खांचे) तैयार किए हैं। जब कोई वाहन लगभग 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की तय रफ्तार से इस हिस्से से गुजरता है, तो टायरों और सड़क के बीच उत्पन्न कंपन एक निश्चित धुन में बदल जाता है। यही कंपन ‘जय हो’ गीत की धुन का अहसास कराता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देना भी है। चूंकि धुन तभी स्पष्ट सुनाई देती है जब वाहन निर्धारित गति सीमा में चलता है, इसलिए यह ड्राइवरों को सही स्पीड बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
दुनिया में मेलोडी रोड की अवधारणा सबसे पहले जापान में विकसित की गई थी। इसके बाद दक्षिण कोरिया, हंगरी और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी इस तकनीक का उपयोग हुआ। अब भारत ने भी इस नवाचार को अपनाते हुए मुंबई में इसकी शुरुआत की है।
करीब 10.5 किलोमीटर लंबी मुंबई कोस्टल रोड पहले ही शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करने और यात्रा समय घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में यह संगीतमय पहल यात्रियों के अनुभव को और खास बनाएगी।
नगर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में अन्य शहरों या राजमार्गों पर भी इस तरह की मेलोडी रोड विकसित की जा सकती है। हालांकि इसके रखरखाव और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मुंबई, जो पहले से ही फिल्म, संगीत और रचनात्मकता का केंद्र माना जाता है, अब सड़क परिवहन में भी एक नया सुर जोड़ चुका है। ‘जय हो’ की धुन के साथ यह सड़क न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण बनेगी, बल्कि यात्रियों के लिए एक यादगार अनुभव भी साबित होगी।
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