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नेसेट में मोदी संबोधन
इजरायली संसद में मोदी का भाषण चर्चा का केंद्र बना
इजरायली संसद में मोदी के भाषण पर मुस्लिम देशों की मीडिया ने जताई नाराजगी
26 Feb 2026, 03:00 PM
Tel Aviv District
-
Tel Aviv
Reporter :
Mahesh Sharma
Tel Aviv
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे के दौरान इजरायली संसद नेसेट में दिए गए भाषण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। जहां इजरायल में इस संबोधन को ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया, वहीं कई मुस्लिम देशों की मीडिया ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों का उल्लेख करते हुए हमास की कार्रवाई को बर्बर बताया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सुरक्षा, तकनीक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में क्षेत्रीय शांति के लिए किए गए अब्राहम समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से पश्चिम एशिया में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा मिली है।
हालांकि पश्चिम एशिया और कुछ मुस्लिम देशों की मीडिया ने इस भाषण को भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक नीति से अलग बताया। कई रिपोर्टों में कहा गया कि भारत अब इजरायल के अधिक करीब दिखाई दे रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने यह भी टिप्पणी की कि भारत की विदेश नीति में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत संतुलन की नीति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इजरायल के साथ बढ़ती नजदीकी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इजरायली मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया और इसे दोनों देशों के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत बताया। वहीं दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान से भारत की पारंपरिक तटस्थ छवि प्रभावित हो सकती है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इजरायल और अरब देशों दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में शांति और सहयोग का भी संदेश दिया।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर इसे रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, तो दूसरी ओर कुछ देशों की मीडिया इसे भारत की विदेश नीति में नए रुख के रूप में देख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों का उल्लेख करते हुए हमास की कार्रवाई को बर्बर बताया और कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सुरक्षा, तकनीक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में क्षेत्रीय शांति के लिए किए गए अब्राहम समझौते की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से पश्चिम एशिया में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा मिली है।
हालांकि पश्चिम एशिया और कुछ मुस्लिम देशों की मीडिया ने इस भाषण को भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक नीति से अलग बताया। कई रिपोर्टों में कहा गया कि भारत अब इजरायल के अधिक करीब दिखाई दे रहा है, जिससे क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने यह भी टिप्पणी की कि भारत की विदेश नीति में बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत संतुलन की नीति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इजरायल के साथ बढ़ती नजदीकी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इजरायली मीडिया ने प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत किया और इसे दोनों देशों के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत बताया। वहीं दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान से भारत की पारंपरिक तटस्थ छवि प्रभावित हो सकती है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इजरायल और अरब देशों दोनों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में शांति और सहयोग का भी संदेश दिया।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर इसे रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, तो दूसरी ओर कुछ देशों की मीडिया इसे भारत की विदेश नीति में नए रुख के रूप में देख रही है।
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