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साइबर ठगी का जाल
मोबाइल पर आए शादी कार्ड लिंक से इंदौर में साइबर ठगी का खुलासा
शादी का कार्ड बना साइबर जाल, लिंक क्लिक करते ही उड़ सकता है बैंक अकाउंट
07 Feb 2026, 04:39 PM
Madhya Pradesh
-
Indore
Reporter :
Mahesh Sharma
Indore
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का एक नया और बेहद शातिर तरीका अपनाया है। इस बार ठगों ने शादी के डिजिटल कार्ड को हथियार बनाया, जिसमें एक लिंक दिया गया था। जैसे ही लोग उस लिंक पर क्लिक करते, उनके मोबाइल और बैंक अकाउंट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती थी।
मामला तब सामने आया जब शहर के कई लोगों के मोबाइल फोन पर एक आकर्षक शादी का निमंत्रण कार्ड व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया। कार्ड देखने में बिल्कुल असली था, जिसमें शादी की तारीख 24 फरवरी 2026 लिखी थी और भाषा भी पूरी तरह औपचारिक व भरोसेमंद लग रही थी। कार्ड के साथ एक लिंक भी दिया गया था, जिसे क्लिक कर कार्यक्रम का विवरण देखने को कहा गया था।
यह फर्जी शादी निमंत्रण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सदाशिव यादव के नाम से भेजा गया था। शुरुआत में लोगों को इसमें कोई शक नहीं हुआ, लेकिन जब लिंक पर क्लिक करने से जुड़ी आशंकाएं सामने आईं, तो मामला संदिग्ध हो गया।
सदाशिव यादव ने जैसे ही इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर लोगों को सतर्क किया। उन्होंने साफ कहा कि उनका मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट हैक नहीं हुआ है और यह पूरी तरह से साइबर ठगों की साजिश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस तरह के किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह मामला फिशिंग लिंक से जुड़ा हो सकता है। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जिससे ठग बैंक डिटेल्स, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद पीड़ित का बैंक अकाउंट खाली होने में ज्यादा समय नहीं लगता।
पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ठग अक्सर शादी के कार्ड, कूरियर डिलीवरी, इनाम जीतने या इवेंट इनविटेशन जैसे भावनात्मक और भरोसेमंद तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि लोग बिना सोचे-समझे लिंक खोल दें।
साइबर पुलिस ने आम लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी जान-पहचान वाले के नाम से ही क्यों न आया हो। अगर कोई लिंक संदिग्ध लगे तो उसकी पुष्टि सीधे संबंधित व्यक्ति से करें। साथ ही, किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि डिजिटल दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
मामला तब सामने आया जब शहर के कई लोगों के मोबाइल फोन पर एक आकर्षक शादी का निमंत्रण कार्ड व्हाट्सऐप के जरिए भेजा गया। कार्ड देखने में बिल्कुल असली था, जिसमें शादी की तारीख 24 फरवरी 2026 लिखी थी और भाषा भी पूरी तरह औपचारिक व भरोसेमंद लग रही थी। कार्ड के साथ एक लिंक भी दिया गया था, जिसे क्लिक कर कार्यक्रम का विवरण देखने को कहा गया था।
यह फर्जी शादी निमंत्रण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सदाशिव यादव के नाम से भेजा गया था। शुरुआत में लोगों को इसमें कोई शक नहीं हुआ, लेकिन जब लिंक पर क्लिक करने से जुड़ी आशंकाएं सामने आईं, तो मामला संदिग्ध हो गया।
सदाशिव यादव ने जैसे ही इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर लोगों को सतर्क किया। उन्होंने साफ कहा कि उनका मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट हैक नहीं हुआ है और यह पूरी तरह से साइबर ठगों की साजिश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस तरह के किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह मामला फिशिंग लिंक से जुड़ा हो सकता है। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मालवेयर इंस्टॉल हो सकता है, जिससे ठग बैंक डिटेल्स, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद पीड़ित का बैंक अकाउंट खाली होने में ज्यादा समय नहीं लगता।
पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ठग अक्सर शादी के कार्ड, कूरियर डिलीवरी, इनाम जीतने या इवेंट इनविटेशन जैसे भावनात्मक और भरोसेमंद तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि लोग बिना सोचे-समझे लिंक खोल दें।
साइबर पुलिस ने आम लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, चाहे वह किसी जान-पहचान वाले के नाम से ही क्यों न आया हो। अगर कोई लिंक संदिग्ध लगे तो उसकी पुष्टि सीधे संबंधित व्यक्ति से करें। साथ ही, किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि डिजिटल दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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