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समुद्री तापमान में बदलाव संकेत
आने वाले महीनों में महासागरों का तापमान बदलने की संभावना
मार्च से मई तक समुद्री तापमान में बदलाव से मौसम पैटर्न प्रभावित होने की संभावना
23 Feb 2026, 11:12 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
दुनियाभर के महासागरों के तापमान में लगातार हो रहे बदलाव को लेकर वैज्ञानिकों ने नई चेतावनी जारी की है। World Meteorological Organization (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच समुद्री सतह के तापमान में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं, जिसका असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच समुद्र की सतह का औसत तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागरों में तापमान बढ़ने से मौसम चक्र प्रभावित होता है और कई क्षेत्रों में असामान्य वर्षा या तापमान परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बदलाव की स्थिति बन सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च से मई के बीच मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है, जबकि पश्चिमी प्रशांत महासागर में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि पिछले महीनों में समुद्री तापमान बढ़ने की वजह से हल्की La Niña जैसी परिस्थितियां बनी रहीं। यह स्थिति समुद्र के विभिन्न हिस्सों में तापमान के अंतर के कारण उत्पन्न होती है और इसका असर मानसून तथा वैश्विक मौसम पर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के तापमान में उतार-चढ़ाव से तूफानों की तीव्रता, वर्षा का पैटर्न और तापमान वितरण प्रभावित हो सकता है। समुद्री तापमान में वृद्धि को जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेतों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समुद्री तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है तो इसका प्रभाव कृषि, मत्स्य उद्योग और तटीय क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। कई देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि मौसम की अनिश्चितता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है।
जलवायु वैज्ञानिकों ने महासागरों के तापमान पर लगातार निगरानी बनाए रखने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि समय रहते सटीक पूर्वानुमान से संभावित प्रभावों को कम किया जा सकता है।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में मौसम का स्वरूप सामान्य से अलग हो सकता है। इसलिए विभिन्न देशों की मौसम एजेंसियों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां करने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच समुद्र की सतह का औसत तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागरों में तापमान बढ़ने से मौसम चक्र प्रभावित होता है और कई क्षेत्रों में असामान्य वर्षा या तापमान परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस अवधि में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बदलाव की स्थिति बन सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मार्च से मई के बीच मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है, जबकि पश्चिमी प्रशांत महासागर में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि पिछले महीनों में समुद्री तापमान बढ़ने की वजह से हल्की La Niña जैसी परिस्थितियां बनी रहीं। यह स्थिति समुद्र के विभिन्न हिस्सों में तापमान के अंतर के कारण उत्पन्न होती है और इसका असर मानसून तथा वैश्विक मौसम पर पड़ सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के तापमान में उतार-चढ़ाव से तूफानों की तीव्रता, वर्षा का पैटर्न और तापमान वितरण प्रभावित हो सकता है। समुद्री तापमान में वृद्धि को जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेतों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समुद्री तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है तो इसका प्रभाव कृषि, मत्स्य उद्योग और तटीय क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। कई देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि मौसम की अनिश्चितता आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है।
जलवायु वैज्ञानिकों ने महासागरों के तापमान पर लगातार निगरानी बनाए रखने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि समय रहते सटीक पूर्वानुमान से संभावित प्रभावों को कम किया जा सकता है।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में मौसम का स्वरूप सामान्य से अलग हो सकता है। इसलिए विभिन्न देशों की मौसम एजेंसियों को सतर्क रहने और आवश्यक तैयारियां करने की सलाह दी गई है।
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