Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका
प्रयागराज पीओसीएसओ केस में स्वामी और शिष्यों ने न्याय की गुहार
यौन शोषण मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की
24 Feb 2026, 02:37 PM Uttar Pradesh - Prayagraj (Allahabad)
Reporter : Mahesh Sharma
Prayagraj (Allahabad) प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक गंभीर यौन शोषण मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दोनों आरोपी अब हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। याचिका में उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की जांच पूरी होने तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए।

यह मामला 21 फरवरी 2026 को दर्ज किया गया था और इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद और 2-3 अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक कृत्य किए। शिकायत के अनुसार घटना झूंसी थाने के क्षेत्र में हुई और इसे गंभीरता से लिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए। उनका तर्क है कि गिरफ्तारी से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और धार्मिक कार्यों पर गंभीर असर पड़ेगा। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि वे पूरी तरह जांच में सहयोग देने को तैयार हैं और किसी भी तरह की सबूत छेड़छाड़ या भागने का इरादा नहीं रखते।

प्रयागराज के पुलिस अधिकारी बताते हैं कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और साक्ष्यों और गवाहों की पुष्टिकरण की प्रक्रिया चल रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं, और अब हाईकोर्ट की सुनवाई से उनकी स्थिति स्पष्ट होगी।

इस मामले ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा कर दी है। सामाजिक मीडिया और समाचार चैनलों पर इस केस को लेकर व्यापक बहस चल रही है। लोगों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट इस मामले में अग्रिम जमानत की अनुमति देता है या नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो एक्ट के मामले संवेदनशील और गंभीर होते हैं, इसलिए अदालत हर पहलू को ध्यान में रखते हुए न्याय निर्णय देती है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने तक अग्रिम जमानत देने का निर्णय आम तौर पर आरोपी की पूर्व गतिविधियों, समाज में स्थिति और जांच में सहयोग की भावना पर निर्भर करता है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका अब न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई है। अदालत के फैसले का असर न केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर पड़ेगा, बल्कि इस केस की जांच प्रक्रिया और भविष्य की कानूनी रणनीतियों पर भी प्रभाव डालेगा।

यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में पॉक्सो एक्ट की गंभीरता और धार्मिक व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारियों पर एक नया दृष्टिकोण पेश कर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश का इंतजार अब पूरे देश में किया जा रहा है।
ADVERTISEMENT Sponsored
Ad
Open

More News

thumb
न्‍यूजीलैंड की जीत से बदल गया दूसरे ग्रुप का समीकरण, पाकिस्‍तान अब भी सेमीफाइनल में पहुंच सकता
February 26, 2026
thumb
जस्टिस यशवंत वर्मा जांच समिति में बदलाव, मद्रास हाईकोर्ट की जगह बॉम्बे हाईकोर्ट शामिल किया गया
February 26, 2026
thumb
कूनो में चीतों के भोजन पर भारी खर्च, रोजाना बकरी मांस पर हजारों रुपये खर्च
February 26, 2026
thumb
लखनऊ में बेटे ने पिता की हत्या की, सबूत मिटाने की कोशिश से खुला मामला
February 26, 2026
thumb
पाठ्यपुस्तक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर जवाबदेही तय होगी
February 26, 2026
thumb
एआई सम्मेलन विवाद में चर्चित अधिकारी राहुल विक्रम, कई बड़े ऑपरेशन में निभा चुके अहम भूमिका
February 26, 2026
thumb
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अध्याय विवाद पर एनसीईआरटी ने मांगी माफी, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
February 26, 2026
thumb
जापान दौरे में मुख्यमंत्री योगी ने निवेशकों को आमंत्रित किया, औद्योगिक विकास योजनाएं बताईं विस्तार से
February 26, 2026
thumb
इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी का बड़ा रिकॉर्ड, 10 करोड़ फॉलोअर्स के साथ बने सबसे लोकप्रिय नेता
February 26, 2026
thumb
जिम्बाब्वे मुकाबला टीम इंडिया के लिए करो या मरो, हार से सेमीफाइनल उम्मीदें खत्म
February 26, 2026
ADVERTISEMENT Sponsored
Advertisement Open