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590 करोड़ घोटाले की जांच
सरकारी खातों से करोड़ों रुपये अवैध रूप से ट्रांसफर किए गए
हरियाणा में 590 करोड़ घोटाले पर IDFC बैंक घिरा, विजिलेंस ने दर्ज की FIR जांच शुरू
24 Feb 2026, 01:27 PM
Haryana
-
Gurgaon
Reporter :
Mahesh Sharma
Gurgaon
हरियाणा में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का मामला सामने आया है, जिसमें लगभग 590 करोड़ रुपये के गबन का आरोप लगाया गया है। इस मामले में राज्य की विजिलेंस और एंटी-करप्शन एजेंसी ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है और बैंक अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला चंडीगढ़ स्थित एक निजी बैंक शाखा से जुड़ा हुआ है, जहां हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से बड़ी राशि संदिग्ध तरीके से दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह लेनदेन फर्जी दस्तावेजों और अवैध प्रक्रियाओं के जरिए किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी खातों से धन निकालने के लिए फर्जी चेक और संदिग्ध बैंकिंग प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया। आरोप है कि कुछ बैंक कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत से यह पूरी साजिश रची गई। इस दौरान सरकारी रकम को अलग-अलग बाहरी खातों में भेजा गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ जब संबंधित विभागों ने अपने खातों के लेनदेन का मिलान किया और असामान्य ट्रांजैक्शन सामने आए। इसके बाद मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई, जिसके आधार पर विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू की।
प्राथमिकी में बैंक अधिकारियों, कुछ सरकारी कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि इस पूरे घोटाले की योजना कैसे बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि धन किस-किस खाते में भेजा गया और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला सरकारी धन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। बड़े स्तर पर धन के अवैध ट्रांसफर से बैंकिंग प्रणाली की निगरानी और नियंत्रण तंत्र की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।
विजिलेंस विभाग ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने राज्य में बैंकिंग सुरक्षा और सरकारी खातों की निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार यह मामला चंडीगढ़ स्थित एक निजी बैंक शाखा से जुड़ा हुआ है, जहां हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से बड़ी राशि संदिग्ध तरीके से दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह लेनदेन फर्जी दस्तावेजों और अवैध प्रक्रियाओं के जरिए किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी खातों से धन निकालने के लिए फर्जी चेक और संदिग्ध बैंकिंग प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया। आरोप है कि कुछ बैंक कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत से यह पूरी साजिश रची गई। इस दौरान सरकारी रकम को अलग-अलग बाहरी खातों में भेजा गया, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ जब संबंधित विभागों ने अपने खातों के लेनदेन का मिलान किया और असामान्य ट्रांजैक्शन सामने आए। इसके बाद मामले की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई, जिसके आधार पर विजिलेंस विभाग ने जांच शुरू की।
प्राथमिकी में बैंक अधिकारियों, कुछ सरकारी कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि इस पूरे घोटाले की योजना कैसे बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि धन किस-किस खाते में भेजा गया और उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया गया।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला सरकारी धन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। बड़े स्तर पर धन के अवैध ट्रांसफर से बैंकिंग प्रणाली की निगरानी और नियंत्रण तंत्र की भी जांच जरूरी मानी जा रही है।
विजिलेंस विभाग ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने राज्य में बैंकिंग सुरक्षा और सरकारी खातों की निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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