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अंतरिक्ष में भारत का डेटा सेंटर
Agnikul और NeevCloud मिलकर AI डेटा सेंटर लॉन्च करेंगे
भारत का पहला अंतरिक्ष AI डेटा सेंटर 2026 में शुरू बदल सकता है टेक्नोलॉजी का परिदृश्य
23 Feb 2026, 02:53 PM
Tamil Nadu
-
Chennai
Reporter :
Mahesh Sharma
Chennai
भारत अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। चेन्नई की स्पेस कंपनी Agnikul Cosmos और AI क्लाउड कंपनी NeevCloud मिलकर अंतरिक्ष में देश का पहला AI डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही हैं। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य AI और डेटा प्रोसेसिंग के तरीके में क्रांति लाना है।
यह डेटा सेंटर पृथ्वी के पास की कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में लगाया जाएगा। कंपनियों का दावा है कि इसका पहला टेस्ट 2026 के अंत तक हो सकता है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो भारत अंतरिक्ष में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में वैश्विक पायदान पर पहुंच जाएगा।
स्पेस में डेटा सेंटर स्थापित करने के कई फायदे हैं। वर्तमान में बड़े डेटा सेंटर जमीन पर बनाए जाते हैं, जिनमें सर्वर और कंप्यूटर रखे जाते हैं। अंतरिक्ष में डेटा सेंटर होने से AI मॉडल तेज़ी से प्रोसेस होंगे, नेटवर्क की गति बढ़ेगी और प्राकृतिक आपदाओं या बिजली कटौती जैसी समस्याओं का असर कम होगा।
Agnikul Cosmos रॉकेट और स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करती है। कंपनी का उद्देश्य अंतरिक्ष में छोटे और किफायती AI डेटा सेंटर स्थापित करना है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी शोध में मददगार साबित होगा। दूसरी ओर, NeevCloud AI और क्लाउड तकनीक में विशेषज्ञ है। यह कंपनी AI मॉडल को रन करने और डेटा प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस प्रयोग की सफलता से भविष्य में AI का काम करने का तरीका बदल सकता है। अभी जो कार्य जमीन पर डेटा सेंटर से किए जाते हैं, उन्हें अंतरिक्ष के माध्यम से तेज़ और सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा। मॉडल में लगे कंप्यूटर और सर्वर सीधे AI से जुड़े कार्य करेंगे। नीचे जमीन से भेजा गया डेटा उपर इस सिस्टम तक पहुंचेगा, और फिर प्रक्रिया के बाद वापस उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाई जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना भारत को तकनीकी रूप से अंतरिक्ष में अग्रणी बनाने में मदद करेगी। साथ ही, यह अंतरिक्ष और AI को जोड़ने वाला पहला कदम होगा, जो भविष्य में विभिन्न उद्योगों में नए अवसर पैदा कर सकता है।
अमेरिकी अरबपति Elon Musk भी स्पेस में डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रयास में हैं। हालांकि, भारत की यह पहल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा देगी।
इस तरह, 2026 के अंत तक भारत का पहला अंतरिक्ष AI डेटा सेंटर न केवल देश की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के भविष्य को भी आकार देगा।
यह डेटा सेंटर पृथ्वी के पास की कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में लगाया जाएगा। कंपनियों का दावा है कि इसका पहला टेस्ट 2026 के अंत तक हो सकता है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है, तो भारत अंतरिक्ष में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में वैश्विक पायदान पर पहुंच जाएगा।
स्पेस में डेटा सेंटर स्थापित करने के कई फायदे हैं। वर्तमान में बड़े डेटा सेंटर जमीन पर बनाए जाते हैं, जिनमें सर्वर और कंप्यूटर रखे जाते हैं। अंतरिक्ष में डेटा सेंटर होने से AI मॉडल तेज़ी से प्रोसेस होंगे, नेटवर्क की गति बढ़ेगी और प्राकृतिक आपदाओं या बिजली कटौती जैसी समस्याओं का असर कम होगा।
Agnikul Cosmos रॉकेट और स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करती है। कंपनी का उद्देश्य अंतरिक्ष में छोटे और किफायती AI डेटा सेंटर स्थापित करना है, जो वैज्ञानिक और तकनीकी शोध में मददगार साबित होगा। दूसरी ओर, NeevCloud AI और क्लाउड तकनीक में विशेषज्ञ है। यह कंपनी AI मॉडल को रन करने और डेटा प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी संभालेगी।
इस प्रयोग की सफलता से भविष्य में AI का काम करने का तरीका बदल सकता है। अभी जो कार्य जमीन पर डेटा सेंटर से किए जाते हैं, उन्हें अंतरिक्ष के माध्यम से तेज़ और सुरक्षित तरीके से किया जा सकेगा। मॉडल में लगे कंप्यूटर और सर्वर सीधे AI से जुड़े कार्य करेंगे। नीचे जमीन से भेजा गया डेटा उपर इस सिस्टम तक पहुंचेगा, और फिर प्रक्रिया के बाद वापस उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाई जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना भारत को तकनीकी रूप से अंतरिक्ष में अग्रणी बनाने में मदद करेगी। साथ ही, यह अंतरिक्ष और AI को जोड़ने वाला पहला कदम होगा, जो भविष्य में विभिन्न उद्योगों में नए अवसर पैदा कर सकता है।
अमेरिकी अरबपति Elon Musk भी स्पेस में डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रयास में हैं। हालांकि, भारत की यह पहल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा और नवाचार दोनों को बढ़ावा देगी।
इस तरह, 2026 के अंत तक भारत का पहला अंतरिक्ष AI डेटा सेंटर न केवल देश की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगा बल्कि AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के भविष्य को भी आकार देगा।
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