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डीआईजी भुल्लर गिरफ्तार
सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों किया गिरफ्तार
रिश्वत कांड में फंसे पंजाब पुलिस के डीआईजी भुल्लर की जमानत अर्जी खारिज
16 Feb 2026, 12:39 PM
Punjab
-
Amritsar
Reporter :
Mahesh Sharma
Amritsar
पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और डीआईजी रैंक के अधिकारी Harcharan Singh Bhullar को रिश्वत मामले में फिलहाल जेल में ही रहना होगा। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। भुल्लर को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation (सीबीआई) ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
जानकारी के अनुसार, सीबीआई को शिकायत मिली थी कि डीआईजी स्तर के अधिकारी एक मामले में राहत देने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने जाल बिछाया और तय रकम के साथ कार्रवाई की। इसी दौरान अधिकारी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ प्रारंभिक साक्ष्य मजबूत हैं और जांच अभी जारी है। ऐसे में यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो वे सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं या गवाहों पर दबाव बना सकते हैं। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि डीआईजी भुल्लर को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। मामले ने पंजाब पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है। वरिष्ठ स्तर के अधिकारी पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अदालतें आमतौर पर सख्त रुख अपनाती हैं, खासकर तब जब आरोपी उच्च पद पर आसीन रहा हो। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने का अवसर दिया जाता है।
सीबीआई अब इस मामले में वित्तीय लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकता है।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में चाहे पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं है। अदालत के ताजा फैसले ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जवाबदेही से कोई भी ऊपर नहीं है।
जानकारी के अनुसार, सीबीआई को शिकायत मिली थी कि डीआईजी स्तर के अधिकारी एक मामले में राहत देने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने जाल बिछाया और तय रकम के साथ कार्रवाई की। इसी दौरान अधिकारी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया गया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ प्रारंभिक साक्ष्य मजबूत हैं और जांच अभी जारी है। ऐसे में यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो वे सबूतों को प्रभावित कर सकते हैं या गवाहों पर दबाव बना सकते हैं। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि डीआईजी भुल्लर को फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा। मामले ने पंजाब पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है। वरिष्ठ स्तर के अधिकारी पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अदालतें आमतौर पर सख्त रुख अपनाती हैं, खासकर तब जब आरोपी उच्च पद पर आसीन रहा हो। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने का अवसर दिया जाता है।
सीबीआई अब इस मामले में वित्तीय लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है। संभावना है कि आने वाले दिनों में मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकता है।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में चाहे पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं है। अदालत के ताजा फैसले ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जवाबदेही से कोई भी ऊपर नहीं है।
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