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हाईकोर्ट आदेश
हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को CMO संदेश भेजने पर रोक लगाई
सरकारी कर्मचारियों को संदेश भेजने पर हाईकोर्ट सख्त, CMO को तुरंत रोक लगाने का आदेश
24 Feb 2026, 04:58 PM
Kerala
-
Cochin
Reporter :
Mahesh Sharma
Cochin
केरल सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब केरल हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को सरकारी कर्मचारियों को सीधे संदेश भेजने से रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने इस मामले को कर्मचारियों की निजता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कर्मचारियों को इस प्रकार व्यक्तिगत मोबाइल नंबर या ईमेल पर संदेश भेजना उचित नहीं है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के पास कर्मचारियों के मोबाइल नंबर और ईमेल पते कैसे पहुंचे।
इस मामले में दायर याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के कई सरकारी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नियमित संदेश भेजे जा रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उनकी निजी जानकारी सरकारी कार्यालय तक कैसे पहुंची। इससे कर्मचारियों में असहजता और चिंता का माहौल बन गया है।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कर्मचारियों का व्यक्तिगत डेटा सरकारी वेतन प्रबंधन प्रणाली ‘स्पार्क’ (Service and Payroll Administrative Repository for Kerala) से लिया गया हो सकता है। अदालत ने इस संभावना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट जानकारी देने को कहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में पारदर्शिता बनाए और बताए कि डेटा किस प्रक्रिया के तहत एकत्र किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने निजता के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा का पूरा अधिकार है। न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो आगे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकारी कर्मचारियों के संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है और इसे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को प्रशासनिक दबाव में लाने के लिए इस प्रकार के संदेश नहीं भेजे जाने चाहिए।
फिलहाल अदालत ने मुख्यमंत्री कार्यालय को कर्मचारियों को संदेश भेजने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
यह मामला सरकारी तंत्र में डेटा सुरक्षा और निजता के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सरकारी कर्मचारियों को इस प्रकार व्यक्तिगत मोबाइल नंबर या ईमेल पर संदेश भेजना उचित नहीं है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी पूछा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के पास कर्मचारियों के मोबाइल नंबर और ईमेल पते कैसे पहुंचे।
इस मामले में दायर याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के कई सरकारी कर्मचारियों को मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नियमित संदेश भेजे जा रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि उनकी निजी जानकारी सरकारी कार्यालय तक कैसे पहुंची। इससे कर्मचारियों में असहजता और चिंता का माहौल बन गया है।
याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कर्मचारियों का व्यक्तिगत डेटा सरकारी वेतन प्रबंधन प्रणाली ‘स्पार्क’ (Service and Payroll Administrative Repository for Kerala) से लिया गया हो सकता है। अदालत ने इस संभावना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट जानकारी देने को कहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग बिना अनुमति के नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में पारदर्शिता बनाए और बताए कि डेटा किस प्रक्रिया के तहत एकत्र किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने निजता के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा का पूरा अधिकार है। न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो आगे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकारी कर्मचारियों के संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है और इसे कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को प्रशासनिक दबाव में लाने के लिए इस प्रकार के संदेश नहीं भेजे जाने चाहिए।
फिलहाल अदालत ने मुख्यमंत्री कार्यालय को कर्मचारियों को संदेश भेजने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
यह मामला सरकारी तंत्र में डेटा सुरक्षा और निजता के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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