Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
सत्ता से दूरी का दावा
संघ राजनीति नहीं समाज संगठन पर केंद्रित
सत्ता नहीं, समाज संगठन हमारा ध्येय: मेरठ में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश
21 Feb 2026, 11:55 AM Uttar Pradesh - Meerut
Reporter : Mahesh Sharma
Meerut मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने संगठन की विचारधारा और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संघ का लक्ष्य राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनाना है।

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि संघ किसी राजनीतिक स्पर्धा या विरोध की भावना से कार्य नहीं करता। उनका कहना था कि संगठन का उद्देश्य अपना नाम बड़ा करना नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि संघ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।

भारत की अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश को केवल भौगोलिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत में निहित है। उन्होंने भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध और अन्य महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी भारत की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं।

‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या करते हुए भागवत ने कहा कि यह किसी एक जाति या संप्रदाय का द्योतक नहीं है, बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक है। पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, देवी-देवताओं के स्वरूप भिन्न हो सकते हैं, लेकिन सांस्कृतिक आधार एक है। इसी एकता को मजबूत करना संघ का मुख्य उद्देश्य है।

कार्यक्रम में मौजूद स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब समाज संगठित और जागरूक होगा, तब देश स्वतः सशक्त बनेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे वक्तव्य संघ की उस दीर्घकालिक रणनीति को रेखांकित करते हैं, जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक संगठन को प्राथमिकता दी जाती है। संघ लंबे समय से स्वयंसेवक आधारित संरचना के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश करता रहा है।

कुल मिलाकर, मेरठ में दिया गया यह संदेश संगठन की मूल विचारधारा की पुनर्पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। भागवत के वक्तव्य ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि संघ अपने कार्य को सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि राजनीतिक शक्ति प्राप्ति के साधन के रूप में।
ADVERTISEMENT Sponsored
Advertisement
Ad
Open

More News

thumb
जापान यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री को मिली महावीर प्रतिमा, सांस्कृतिक संबंधों का संदेश दिया गया
February 26, 2026
thumb
घर में कलर प्रिंटर से छाप रहे थे 500-500 के नोट, इन्हीं पैसों से 50 लाख लोन चुकता करने की थी तैयारी
February 25, 2026
thumb
नेशनल हाईवे से जुड़े काम आसान राजमार्ग प्रवेश पोर्टल से मिलेगी ऑनलाइन मंजूरी सुविधा
February 26, 2026
thumb
जिम्बाब्वे मुकाबला टीम इंडिया के लिए करो या मरो, हार से सेमीफाइनल उम्मीदें खत्म
February 26, 2026
thumb
इजरायल दौरे पर पीएम मोदी को लेकर राहुल गांधी का हमला, उठाए कई सवाल
February 26, 2026
thumb
होली पर यात्रियों को राहत रेलवे चलाएगा देशभर में हजारों अतिरिक्त स्पेशल ट्रेन सेवाएं
February 26, 2026
thumb
अग्रिम जमानत पर कल फैसला संभव, धार्मिक नेता की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई
February 26, 2026
thumb
पाठ्यपुस्तक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर जवाबदेही तय होगी
February 26, 2026
thumb
लखनऊ में बेटे ने पिता की हत्या की, सबूत मिटाने की कोशिश से खुला मामला
February 26, 2026
thumb
कूनो में चीतों के भोजन पर भारी खर्च, रोजाना बकरी मांस पर हजारों रुपये खर्च
February 26, 2026
ADVERTISEMENT Sponsored
Open