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हस्तिनापुर सीट पर फोकस
हस्तिनापुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में चंद्रशेखर आजाद
हस्तिनापुर सीट पर नजरें टिकाए चंद्रशेखर आजाद, 2027 चुनाव के लिए नई रणनीति तैयार
26 Feb 2026, 01:45 PM
Uttar Pradesh
-
Meerut
Reporter :
Mahesh Sharma
Meerut
उत्तर प्रदेश की राजनीति में तेजी से उभरते दलित नेता Chandrashekhar Azad ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। नगीना लोकसभा सीट से सांसद होने के बावजूद उनकी नजर मेरठ जिले की हस्तिनापुर विधानसभा सीट पर है। माना जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में इसी सीट से किस्मत आजमा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हस्तिनापुर सीट कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यहां दलित मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली है। यही वजह है कि दलित राजनीति करने वाले नेताओं के लिए यह सीट रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है।
बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ समय से हस्तिनापुर क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने और समर्थकों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि इस सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण उन्हें मजबूत स्थिति में ला सकता है।
हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन लाख से अधिक मतदाता बताए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति समुदाय की है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाता भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। यही सामाजिक समीकरण चंद्रशेखर आजाद के लिए अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में इस सीट से भाजपा के विधायक के रूप में Dinesh Khatik प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे दो बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन आगामी चुनाव को लेकर नई राजनीतिक परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद अपनी जन्मभूमि या पारंपरिक राजनीतिक क्षेत्र के बजाय हस्तिनापुर को इसलिए चुन सकते हैं क्योंकि यहां सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में बनते दिखाई देते हैं। इसके अलावा यह सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली मानी जाती है और यहां से जीत उन्हें प्रदेश स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकती है।
आने वाले समय में यह साफ होगा कि वे आधिकारिक तौर पर हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने की घोषणा करते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल उनकी सक्रियता ने क्षेत्र की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हस्तिनापुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार हस्तिनापुर सीट कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और यहां दलित मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली है। यही वजह है कि दलित राजनीति करने वाले नेताओं के लिए यह सीट रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है।
बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ समय से हस्तिनापुर क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने और समर्थकों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि इस सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं का समीकरण उन्हें मजबूत स्थिति में ला सकता है।
हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन लाख से अधिक मतदाता बताए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या अनुसूचित जाति समुदाय की है। इसके अलावा मुस्लिम मतदाता भी चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। यही सामाजिक समीकरण चंद्रशेखर आजाद के लिए अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में इस सीट से भाजपा के विधायक के रूप में Dinesh Khatik प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे दो बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन आगामी चुनाव को लेकर नई राजनीतिक परिस्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार मुकाबला पहले से अधिक दिलचस्प हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद अपनी जन्मभूमि या पारंपरिक राजनीतिक क्षेत्र के बजाय हस्तिनापुर को इसलिए चुन सकते हैं क्योंकि यहां सामाजिक समीकरण उनके पक्ष में बनते दिखाई देते हैं। इसके अलावा यह सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली मानी जाती है और यहां से जीत उन्हें प्रदेश स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकती है।
आने वाले समय में यह साफ होगा कि वे आधिकारिक तौर पर हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने की घोषणा करते हैं या नहीं, लेकिन फिलहाल उनकी सक्रियता ने क्षेत्र की राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हस्तिनापुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
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