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चुनावी हिंसा रोकने प्रयास
28 फरवरी तक SIR की फाइनल लिस्ट जारी होने वाली
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को रोकने SIR और सुरक्षा बल तैनाती पर जोर
25 Feb 2026, 01:45 PM
West Bengal
-
Kolkata
Reporter :
Mahesh Sharma
Kolkata
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा और चुनावी व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। राज्य में चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है और हर बार सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान यह चुनौती बनी रहती है। इस बार चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद सुरक्षा बलों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
SIR के तहत वोटर लिस्ट की समीक्षा और संभावित असामान्यताओं की पहचान की जाती है। इसके बाद ही सुरक्षा बलों की पूरी तैनाती सुनिश्चित की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को SIR की फाइनल लिस्ट जारी होगी, और 10 मार्च तक राज्यभर में पूरी फोर्स तैनात कर दी जाएगी। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास 1980 और 1990 के दशक तक जाता है। उस समय तृणमूल और बीजेपी का अस्तित्व नहीं था, लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान हिंसा आम थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के समय भी कई हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। इन अनुभवों को देखते हुए राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का निर्णय लिया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती में न केवल पुलिस बल्कि अर्धसैनिक बलों को भी शामिल किया जा रहा है। राज्य के चुनाव अधिकारी बता रहे हैं कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी। मतदान केंद्रों, बूथों और प्रमुख सड़क मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी संवेदनशील इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और पेट्रोलिंग को भी बढ़ाया जाए।
चुनाव आयोग का मानना है कि SIR और सुरक्षा बलों की तैनाती से पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा पर काबू पाया जा सकेगा। इसके अलावा यह कदम मतदाता और राजनीतिक दलों को यह संदेश भी देगा कि चुनाव निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी हिंसा रोकने के लिए केवल सुरक्षा बल तैनात करना ही पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को मतदाता जागरूकता और राजनीतिक दलों के बीच संवाद को भी बढ़ावा देना होगा। इसके बावजूद SIR और फोर्स तैनाती राज्य में मतदान की प्रक्रिया को सुचारू और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस बार के चुनाव में सुरक्षा और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग हर संभव कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि SIR और पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहने की संभावना अधिक है।
SIR के तहत वोटर लिस्ट की समीक्षा और संभावित असामान्यताओं की पहचान की जाती है। इसके बाद ही सुरक्षा बलों की पूरी तैनाती सुनिश्चित की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को SIR की फाइनल लिस्ट जारी होगी, और 10 मार्च तक राज्यभर में पूरी फोर्स तैनात कर दी जाएगी। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करता है कि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा का इतिहास 1980 और 1990 के दशक तक जाता है। उस समय तृणमूल और बीजेपी का अस्तित्व नहीं था, लेकिन कांग्रेस और लेफ्ट के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान हिंसा आम थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के समय भी कई हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। इन अनुभवों को देखते हुए राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने का निर्णय लिया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती में न केवल पुलिस बल्कि अर्धसैनिक बलों को भी शामिल किया जा रहा है। राज्य के चुनाव अधिकारी बता रहे हैं कि सभी संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी। मतदान केंद्रों, बूथों और प्रमुख सड़क मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी संवेदनशील इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और पेट्रोलिंग को भी बढ़ाया जाए।
चुनाव आयोग का मानना है कि SIR और सुरक्षा बलों की तैनाती से पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा पर काबू पाया जा सकेगा। इसके अलावा यह कदम मतदाता और राजनीतिक दलों को यह संदेश भी देगा कि चुनाव निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी हिंसा रोकने के लिए केवल सुरक्षा बल तैनात करना ही पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को मतदाता जागरूकता और राजनीतिक दलों के बीच संवाद को भी बढ़ावा देना होगा। इसके बावजूद SIR और फोर्स तैनाती राज्य में मतदान की प्रक्रिया को सुचारू और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस बार के चुनाव में सुरक्षा और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग हर संभव कदम उठा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि SIR और पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहने की संभावना अधिक है।
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