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पहली परीक्षा देना जरूरी
पहली परीक्षा में शामिल होना अब अनिवार्य कर दिया गया
2026 से 10वीं में पहली बोर्ड परीक्षा अनिवार्य, तभी मिलेगा दूसरा अवसर
17 Feb 2026, 10:15 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए वर्ष 2026 से लागू होने वाली नई परीक्षा प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि नई दो-बोर्ड परीक्षा व्यवस्था के तहत छात्रों को पहली बोर्ड परीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा। पहली परीक्षा में शामिल हुए बिना किसी भी छात्र को दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बोर्ड की इस पहल का उद्देश्य छात्रों को एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करना है, ताकि वे अपने अंकों में सुधार कर सकें। हालांकि, यह अवसर केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा जो निर्धारित समय पर आयोजित पहली परीक्षा में उपस्थित रहेंगे। यदि कोई छात्र बिना वैध कारण के पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो वह दूसरी परीक्षा का पात्र नहीं होगा।
नई प्रणाली के तहत वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी। पहली परीक्षा मुख्य परीक्षा मानी जाएगी, जबकि दूसरी परीक्षा सुधार (इम्प्रूवमेंट) के लिए होगी। छात्र अपनी इच्छा के अनुसार दूसरी परीक्षा में शामिल होकर बेहतर अंक प्राप्त करने का प्रयास कर सकेंगे। अंतिम परिणाम में दोनों परीक्षाओं में से सर्वश्रेष्ठ अंक को मान्यता दी जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय विद्यार्थियों पर परीक्षा के दबाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। एक ही अवसर पर निर्भर रहने के बजाय छात्रों को अपनी तैयारी को बेहतर बनाने और प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह प्रणाली नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें मूल्यांकन को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है।
हालांकि कुछ अभिभावकों और शिक्षकों ने चिंता भी जताई है कि दो परीक्षाओं की तैयारी छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक दबाव पैदा कर सकती है। इस पर बोर्ड का कहना है कि दूसरी परीक्षा पूरी तरह वैकल्पिक होगी और केवल वही छात्र इसमें शामिल होंगे जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं।
CBSE का यह फैसला देशभर के लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करेगा। बोर्ड जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और परीक्षा कैलेंडर जारी करेगा, जिससे स्कूलों और छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
बोर्ड की इस पहल का उद्देश्य छात्रों को एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करना है, ताकि वे अपने अंकों में सुधार कर सकें। हालांकि, यह अवसर केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा जो निर्धारित समय पर आयोजित पहली परीक्षा में उपस्थित रहेंगे। यदि कोई छात्र बिना वैध कारण के पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो वह दूसरी परीक्षा का पात्र नहीं होगा।
नई प्रणाली के तहत वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी। पहली परीक्षा मुख्य परीक्षा मानी जाएगी, जबकि दूसरी परीक्षा सुधार (इम्प्रूवमेंट) के लिए होगी। छात्र अपनी इच्छा के अनुसार दूसरी परीक्षा में शामिल होकर बेहतर अंक प्राप्त करने का प्रयास कर सकेंगे। अंतिम परिणाम में दोनों परीक्षाओं में से सर्वश्रेष्ठ अंक को मान्यता दी जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय विद्यार्थियों पर परीक्षा के दबाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। एक ही अवसर पर निर्भर रहने के बजाय छात्रों को अपनी तैयारी को बेहतर बनाने और प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह प्रणाली नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें मूल्यांकन को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया है।
हालांकि कुछ अभिभावकों और शिक्षकों ने चिंता भी जताई है कि दो परीक्षाओं की तैयारी छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक दबाव पैदा कर सकती है। इस पर बोर्ड का कहना है कि दूसरी परीक्षा पूरी तरह वैकल्पिक होगी और केवल वही छात्र इसमें शामिल होंगे जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं।
CBSE का यह फैसला देशभर के लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करेगा। बोर्ड जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश और परीक्षा कैलेंडर जारी करेगा, जिससे स्कूलों और छात्रों को तैयारी का पर्याप्त समय मिल सके।
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