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रहस्यमयी शोम्पेन जनजाति की दुनिया
बाहरी दुनिया से लगभग अलग रहते हैं शोम्पेन जनजाति लोग
ग्रेट निकोबार के घने जंगलों में रहने वाली शोम्पेन जनजाति आज भी दुनिया से दूर
24 Feb 2026, 12:55 PM
Andaman and Nicobar Islands
-
Nicobar
Reporter :
Mahesh Sharma
Nicobar
भारत के अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप में रहने वाली शोम्पेन जनजाति दुनिया की सबसे रहस्यमयी और अलग-थलग रहने वाली जनजातियों में गिनी जाती है। इस जनजाति के लोगों को बहुत कम लोगों ने करीब से देखा है, क्योंकि ये बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रहना पसंद करते हैं।
शोम्पेन जनजाति मुख्य रूप से ग्रेट निकोबार के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में निवास करती है। इनका जीवन प्रकृति पर आधारित है और ये शिकार, जंगलों से मिलने वाले फल-फूल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली से दूर ये लोग पारंपरिक तरीकों से जीवन बिताते हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शोम्पेन जनजाति का बाहरी दुनिया से संपर्क बेहद सीमित है। यही कारण है कि इनके रहन-सहन, भाषा और परंपराओं के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यह जनजाति आमतौर पर बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखती है और अपने इलाके में किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी पसंद नहीं करती।
भारत सरकार ने इन जनजातियों की सुरक्षा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष नियम बनाए हैं। इनके रहने वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है, ताकि जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली पर कोई असर न पड़े। यही वजह है कि शोम्पेन जनजाति के बारे में जानकारी सीमित है और इनके जीवन से जुड़ी कई बातें अब भी रहस्य बनी हुई हैं।
मानवशास्त्रियों का मानना है कि शोम्पेन जनजाति प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में निवास करती आ रही है। इनकी भाषा और जीवनशैली अन्य जनजातियों से काफी अलग मानी जाती है। आधुनिक तकनीक और विकास के प्रभाव से दूर रहने के कारण इनकी संस्कृति आज भी काफी हद तक मूल रूप में सुरक्षित है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तरह की जनजातियों का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि ये मानव सभ्यता के शुरुआती स्वरूप और पारंपरिक जीवनशैली को समझने में मदद करती हैं। शोम्पेन जनजाति का अस्तित्व भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ग्रेट निकोबार में रहने वाली यह जनजाति आज भी रहस्य और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। सीमित संपर्क और सरकारी सुरक्षा के कारण शोम्पेन लोगों की दुनिया आम लोगों के लिए अब भी अनजानी बनी हुई है।
शोम्पेन जनजाति मुख्य रूप से ग्रेट निकोबार के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में निवास करती है। इनका जीवन प्रकृति पर आधारित है और ये शिकार, जंगलों से मिलने वाले फल-फूल तथा प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहते हैं। आधुनिक जीवनशैली से दूर ये लोग पारंपरिक तरीकों से जीवन बिताते हैं और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार शोम्पेन जनजाति का बाहरी दुनिया से संपर्क बेहद सीमित है। यही कारण है कि इनके रहन-सहन, भाषा और परंपराओं के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। यह जनजाति आमतौर पर बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखती है और अपने इलाके में किसी भी तरह की बाहरी दखलंदाजी पसंद नहीं करती।
भारत सरकार ने इन जनजातियों की सुरक्षा और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए विशेष नियम बनाए हैं। इनके रहने वाले क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है, ताकि जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली पर कोई असर न पड़े। यही वजह है कि शोम्पेन जनजाति के बारे में जानकारी सीमित है और इनके जीवन से जुड़ी कई बातें अब भी रहस्य बनी हुई हैं।
मानवशास्त्रियों का मानना है कि शोम्पेन जनजाति प्राचीन समय से ही इस क्षेत्र में निवास करती आ रही है। इनकी भाषा और जीवनशैली अन्य जनजातियों से काफी अलग मानी जाती है। आधुनिक तकनीक और विकास के प्रभाव से दूर रहने के कारण इनकी संस्कृति आज भी काफी हद तक मूल रूप में सुरक्षित है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि इस तरह की जनजातियों का संरक्षण बेहद जरूरी है, क्योंकि ये मानव सभ्यता के शुरुआती स्वरूप और पारंपरिक जीवनशैली को समझने में मदद करती हैं। शोम्पेन जनजाति का अस्तित्व भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ग्रेट निकोबार में रहने वाली यह जनजाति आज भी रहस्य और जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। सीमित संपर्क और सरकारी सुरक्षा के कारण शोम्पेन लोगों की दुनिया आम लोगों के लिए अब भी अनजानी बनी हुई है।
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